जीवन में लोगो का चयन बहुत सोच समझ कर करे :-
किष्किन्धाकाण्ड में बड़ा रहस्य है;
रामायण के सातो कांडो में किष्किन्धाकाण्ड सबसे छोटा है पर बड़ा महत्तवपूर्ण है, क्योकि श्री हनुमान जी का प्रवेश इस काण्ड में हुआ है.
इस काण्ड में सुग्रीव बड़ा परेशान बताया गया है,पत्नी,पुत्र,राज्य,सभी बालि ने छीन लिया है,और सुग्रीव भाग रहा है,कभी इधर कभी उधर.
यहाँ तक कि जब श्री राम और लक्ष्मण जी को पर्वत के निकट घूमते हुए देखता है तो हनुमान जी से कहता है - आप जाकर पता लगाओ, यदि वे बालि के भेजे हुए होगे तो मै तुरंत ही इस पर्वत हो छोड़कर भाग जाऊँगा
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सुग्रीव जी का सब कुछ चला गया, गुफा में छिपकर रहते है.और वहाँ भी बालि का खतरा बना रहता है.
परन्तु सुग्रीव जी ने एक को बचा लिए वे थे हनुमान जी,सुग्रीव जी के पास कुछ नहीं था पर हनुमान जी थे.
और सुग्रीव जी के पास यही एक अच्छी बात थी,केवल हनुमान जी बचे थे, और हनुमान जी ने सब बचा लिया..
हनुमान जी को सूर्य भगवान ने किष्किन्धा जाने को कहा था,हनुमान जी के पास चयन करने के लिए दो विकल्प थे, वे चाहते तो बालि को चुन सकते थे,बालि की जीवन शैली बड़ी प्रभावशाली थी.
पर जरुरी नहीं जीवन शैली जिसकी प्रभावशाली हो,वह व्यक्ति भी सही दिशा में हो ?
बालि के पास सबकुछ था फिर भी हनुमान जी ने बालि को नहीं चुना क्योकि बालि में बहुत से दोष भी थे जिनमे एक दोष था कि वह बहुत अहंकारी था.और भगवान को अहंकार ही पसंद नहीं.
और हनुमान जी इस प्रसंग से बता भी रहे है जिसके पास अहंकार है भले ही उसके पास सबकुछ है जीवन में उसका चुनाव कभी मत करना,और उन्होंने सुग्रीव को चुना और उनकी मित्रता भगवान से कराई,और अंत में हम सभी जानते है,बालि की हार हुई और सुग्रीव को सबकुछ मिल गया.
और---
सुग्रीव जी हमें सिखा रहे है,कि जीवन में चाहे सब कुछ चला जाए परन्तु संत को कभी अपने जीवन से जाने मत दो,क्योकि संत यदि जीवन में है तो एक दिन भगवान जरुर मिल
जायेगे.
तो सब मिलकर बोलिये:-
जय श्री राम
ॐॐॐ